राजस्थान लोकजीवन शब्दावली Part - 3
1. बिजूका – (अडवो, बिदकणा) – खेत में पशु-
पक्षियों से फसल की रक्षा करने के लिए मानव
जैसी बनाई गयी आकृति
2. उर्डो, ऊर्यो, ऊसरडो, छापर्यो - ऐसा खेत
जिसमे घास और अनाज दोनों में से कुछ भी पैदा
न होता हो
3. अडाव – जब लगातार काम में लेने से भूमि
की उपजाऊ शक्ति कम हो जाने पर उसको
खाली छोड़ दिया जाता है
4. अखड, पड़त, पडेत्या – जो खेत बिना जुता
हुआ पड़ा रहता है
5. पाणत – फसल को पानी देने की प्रक्रिया
6. बावणी – खेत में बीज बोने को कहा जाता
है
7. ढूँगरा, ढूँगरी – जब फसल पक जाने के बाद
काट ली जाती उसको एक जगह ढेर कर दिया
जाता है
8. बाँझड – अनुपजाऊ भूमि
9. गूणी – लाव की खींचने हेतु बैलो के चलने का
ढालनुमा स्थान
10. चरणोत – पशुओं के चरने की भूमि
11. बीड – जिस भूमि का कोई उपयोग में
नहीं लिया जाता है जिसमें सिर्फ घास उगती
हो
12. सड़ो, हडो, बाड़ – पशुओं के खेतों में घुसने से
रोकने के लिए खेत चारो तरफ बनाई गयी मेड
13. गोफन – पत्थर फेकने का चमड़े और
डोरियों से बना यंत्र
14. तंगड-पट्टियाँ – ऊंट को हल जोतते समय
कसने की साज
15. चावर, पाटा, पटेला, हमाडो, पटवास –
जोते गए खेतों को चौरस करने का लकड़ी का
बना चौड़ा तख्ता
16. जावण – दही जमाने के लिए छाछ या
खटाई की अन्य सामग्री
17. गुलेल – पक्षी को मारने/उड़ाने के लिए
दो–शाखी लकड़ी पर रबड़ की पट्टीबांधी
जाती जसमे में बीच में पत्थर रखकर फेंका जाता
है.
18. ठाण – पशुओं को चारा डालने का उपकरण
जो लकड़ी या पत्थर से बनाया जाता है
19. खेली – पशुओं के पानी पिने के लिय
बनाया गया छोड़ा कुंड
20. दंताली – खेत की जमीन को साफ करना
तथा क्यारी या धोरा बनाने के लिए काम में
ली जाती है
पक्षियों से फसल की रक्षा करने के लिए मानव
जैसी बनाई गयी आकृति
2. उर्डो, ऊर्यो, ऊसरडो, छापर्यो - ऐसा खेत
जिसमे घास और अनाज दोनों में से कुछ भी पैदा
न होता हो
3. अडाव – जब लगातार काम में लेने से भूमि
की उपजाऊ शक्ति कम हो जाने पर उसको
खाली छोड़ दिया जाता है
4. अखड, पड़त, पडेत्या – जो खेत बिना जुता
हुआ पड़ा रहता है
5. पाणत – फसल को पानी देने की प्रक्रिया
6. बावणी – खेत में बीज बोने को कहा जाता
है
7. ढूँगरा, ढूँगरी – जब फसल पक जाने के बाद
काट ली जाती उसको एक जगह ढेर कर दिया
जाता है
8. बाँझड – अनुपजाऊ भूमि
9. गूणी – लाव की खींचने हेतु बैलो के चलने का
ढालनुमा स्थान
10. चरणोत – पशुओं के चरने की भूमि
11. बीड – जिस भूमि का कोई उपयोग में
नहीं लिया जाता है जिसमें सिर्फ घास उगती
हो
12. सड़ो, हडो, बाड़ – पशुओं के खेतों में घुसने से
रोकने के लिए खेत चारो तरफ बनाई गयी मेड
13. गोफन – पत्थर फेकने का चमड़े और
डोरियों से बना यंत्र
14. तंगड-पट्टियाँ – ऊंट को हल जोतते समय
कसने की साज
15. चावर, पाटा, पटेला, हमाडो, पटवास –
जोते गए खेतों को चौरस करने का लकड़ी का
बना चौड़ा तख्ता
16. जावण – दही जमाने के लिए छाछ या
खटाई की अन्य सामग्री
17. गुलेल – पक्षी को मारने/उड़ाने के लिए
दो–शाखी लकड़ी पर रबड़ की पट्टीबांधी
जाती जसमे में बीच में पत्थर रखकर फेंका जाता
है.
18. ठाण – पशुओं को चारा डालने का उपकरण
जो लकड़ी या पत्थर से बनाया जाता है
19. खेली – पशुओं के पानी पिने के लिय
बनाया गया छोड़ा कुंड
20. दंताली – खेत की जमीन को साफ करना
तथा क्यारी या धोरा बनाने के लिए काम में
ली जाती है
टिप्पणियाँ