संदेश

जून 21, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लोकतंत्र का काला दिवस 25 जून

आपातकाल आधुनिक भारत के इतिहास का एक काला अध्याय है। आपातकाल थोपे जाने के 40 साल पूरे होने पर उसका स्मरण किया जाना आवश्यक है। इतिहास की भूलों का स्मरण भविष्य की गलतियों के लिए गुंजाइश को कम करता है। आपातकाल पर तमाम चर्चा के बावजूद यह विचित्र है कि 40 साल बाद भी कांग्रेस इसकी जरूरत नहीं महसूस कर रही है कि उसे इंदिरा गांधी की इस भयंकर गलती के लिए देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए। इससे भी विचित्र यह है कि इंदिरा गांधी के करीबी माने जाने वाले कुछ नेता यह स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि आपातकाल के लिए इंदिरा नहीं, बल्कि उनके सलाहकार जिम्मेदार थे। यह जानबूझकर तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की शरारत भरी कोशिश है। आपातकाल थोपे जाते समय प्रधानमंत्री पद पर इंदिरा गांधी ही आसीन थीं, न कि उनके सलाहकार। इसी तरह सभी इससे भी परिचित हैं कि आपातकाल इसलिए लागू किया गया, क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध ठहरा दिया था और सर्वोच्च न्यायालय से उन्हें पर्याप्त राहत नहीं मिल सकी थी। यह कहना सच्चाई से मुंह मोड़ना है कि इंदिरा गांधी अपने सहयोगियों के बहकावे मे...