14 सितंबर ● हिन्दी दिवस || हिन्दी भाषा के उत्सव , उत्साह का दिन हैं|
हिंदी देश की भाषा है । जिससे देश का सम्मान और गौरव जुड़ा है । देश हिंदी में खुद को अभिव्यक्त करता है । आज ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं, जहां हिंदी की उपस्थिति ना हो । हमारे व्यवहार में, बोलचाल में, कैरियर में, लिखने-पढ़ने में, आगे बढ़ने में हिंदी सबसे बड़ी सहायक के रूप में हमारे साथ रहती है । देश में कई तरह की बोली और भाषाएं हैं । ऐसी सभी बोली और भाषाएं हिंदी को सदियों से मज़बूत कर रही हैं आगे बढ़ा रही हैं ।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आज जब देश को न्यू इंडिया (नया भारत) बनाने का आह्वान करते हैं और विज़न देते हैं तो इसका मतलब हिंदी को साथ रखकर, हिंदी के साथ चलकर आगे बढ़ने की बात करते हैं । यह बेहद ख़ुशी की बात है कि देश के युवा आज हिंदी में दिल खोलकर बात कर रहे हैं, खुद को अभिव्यक्त कर रहे हैं । युवा न सिर्फ हिंदी पढ़ रहे हैं बल्कि अन्य को भी हिंदी पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं ।
हिंदी में आज हमारे लिए सैकड़ों रोज़गार उपलब्ध हैं । जिन्हें अपनाकर युवा अपना कैरियर गढ़ रहे हैं । हिंदी भाषा और साहित्य की दुनिया तक ही सीमित नहीं है । यह उससे भी आगे जा चुकी है और पूरी दुनिया में फैल रही है ।
यह हिंदी का ही कमाल है कि बीते महीनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब इजराइल की यात्रा पर गए थे तो वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिंदी में बोलकर उनका स्वागत किया था । यही कारण है कि विदेशी लोग भी अब भारत आकर हिंदी पढ़ रहे हैं, सीख रहे हैं ।
यह कहने में रत्ती भर भी संकोच नहीं है कि हिंदी देश की माटी की सुगंध है । जो चारों और फैलकर हर एक को अपने से जोड़ रही है । हिंदी का यह प्रेम है, ताकत है, अपनत्व है । हम हिंदी को जितना अपनाएंगे, आत्मसात करेंगे हिंदी उतनी ही मज़बूत होगी, आगे बढ़ेगी । हिंदी में बोलते हुए बात करते समय हमें हिंदी के शब्दों का उच्चारण स्पष्ट रूप से करना चाहिए । हिंदी को हम जितना स्पष्ट पढ़ेंगे, बोलेंगे उतना ही उसके प्रति हमारा प्रेम और स्वाभिमान बढ़ेगा । खासकर बच्चों से हिंदी को परिचय जरुर कराएं । क्योंकि हिंदी हमारी मातृभाषा है ।
यह बड़े ही दुःख की बात है कि बहुत से अभिभावक बच्चों को अंग्रेजी और कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाकर हिंदी से उन्हें दूर किए दे रहे हैं । ऐसे बहुत से बच्चे हैं जिन्हें हिंदी के शब्दों की पहचान तक नहीं है । यह नहीं होना चाहिए । इससे देशप्रेम और देश से लगाव की भावना हम में बढ़ नहीं पाती है ।
उम्मीद है अभिभावक इस बात को गंभीरता से समझेंगे । हिंदी को हम आत्मसात करते हुए आगे बढ़ें ।
राज-काज की भाषा बनाएं और यह देखें कि नए बनते भारत को हम हिंदी के जरिए किस तरह मज़बूत कर सकते हैं । यह हम सब की जिम्मेदारी है ।
आप सबको हिंदी दिवस की एक बार पुन: बधाई ।
- रमेश एस० आँजणा
सामाजिक एवं युवा कार्यकर्ता
09772947296
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